ग्रीन एजी परियोजना से उत्तराखंड में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को मिलेगी नई मजबूती: दिलीप जावलकर
जलागम विभाग द्वारा खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के सहयोग से संचालित ग्रीन एजी (GEF-6) परियोजना के तहत पाँच दिवसीय ग्रीन लैंडस्केप प्रबंधन योजना कार्यशाला आयोजन
कहा-जलवायु अनुकूल कृषि, जैव विविधता संरक्षण और वैज्ञानिक संसाधन प्रबंधन को मिलेगी गति
देहरादून में पाँच दिवसीय कार्यशाला में परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन, निगरानी और विभागीय समन्वय पर हुआ मंथन
देहरादून, 5 अगस्त।
उत्तराखंड में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सतत कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जलागम विभाग द्वारा खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के सहयोग से संचालित ग्रीन एजी (GEF-6) परियोजना के तहत पाँच दिवसीय ग्रीन लैंडस्केप प्रबंधन योजना (GLMP) कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए सचिव जलागम एवं मुख्य परियोजना निदेशक दिलीप जावलकर (आईएएस) ने कहा कि ग्रीन लैंडस्केप प्रबंधन योजना का प्रभावी क्रियान्वयन प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन, जलवायु अनुकूल कृषि, जैव विविधता संरक्षण तथा ग्रामीण समुदायों की आजीविका को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने परियोजना की सफलता के लिए प्रभावी निगरानी, जवाबदेही और विभागीय समन्वय को आवश्यक बताया।

कार्यशाला के दौरान संस्थागत, तकनीकी एवं वित्तीय तैयारियों, पर्यावरण एवं सामाजिक प्रबंधन योजना (ESMP), मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP), निगरानी एवं प्रतिवेदन प्रणाली तथा परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। समूह चर्चाओं के माध्यम से साझा कार्ययोजना तैयार करते हुए विभिन्न स्तरों पर बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया।

एफएओ के भारत प्रतिनिधि टाकायुकी हागीवारा ने उत्तराखंड में ग्रीन एजी परियोजना के तहत किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि समुदाय आधारित भागीदारी और संस्थागत क्षमता निर्माण से प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होने के साथ किसानों और ग्रामीण समुदायों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

परियोजना निदेशक कहकशां नसीम (आईएफएस) ने परियोजना के समयबद्ध एवं परिणामोन्मुख क्रियान्वयन, विभागीय समन्वय और संस्थागत तैयारियों को मजबूत बनाने पर बल देते हुए सभी अधिकारियों को निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार कार्य करने के निर्देश दिए।

बैठक में एफएओ, राष्ट्रीय एवं राज्य परियोजना प्रबंधन इकाइयों तथा जलागम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लेकर परियोजना के सफल क्रियान्वयन पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।