चेपड़ों में पिंडर नदी में पोकलैंड से रिवर ड्रेजिंग पर उठे सवाल, प्रशासन को गुमराह करने के आरोप
आईबीएम परिवहन कर रहे भारी वाहनों के द्वारा हाईवे के किनारे आड़े तिरछी खड़े कर वाहन दुर्घटना को दावत दे रहे हैं.
बदलता गढ़वाल न्यूज,
थराली/गिरीश चंदोला।
चमोली। थराली विकासखंड के चेपड़ों गांव के नीचे पिंडर नदी में चल रहे रिवर ड्रेजिंग कार्य को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय लोगों ने नदी में भारी भरकम पोकलैंड मशीनों के उपयोग पर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि नियमों की अनदेखी कर खनन कार्य किया जा रहा है और प्रशासन को गुमराह किया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि रिवर ड्रेजिंग कार्यों में सामान्यतः भारी मशीनों के उपयोग की अनुमति केवल विशेष परिस्थितियों में ही दी जाती है, लेकिन चेपड़ों क्षेत्र में ऐसी कोई असाधारण स्थिति दिखाई नहीं देती।
इसके बावजूद पिंडर नदी के बीचों-बीच पोकलैंड मशीनों से खनन और सामग्री निकासी का कार्य जारी है, जिससे नदी के स्वरूप और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि ड्रेजिंग से निकाली जा रही आईबीएम सामग्री के परिवहन में लगे भारी वाहन राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे आड़े-तिरछे खड़े किए जा रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। उनका कहना है कि संबंधित विभागों और प्रशासन को इस ओर तत्काल ध्यान देना चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले थराली और आसपास के क्षेत्रों में हुए रिवर ड्रेजिंग कार्यों में भारी मशीनों के उपयोग पर प्रतिबंध रहा है, लेकिन इस बार अधिकारी नियमावली का हवाला देकर पोकलैंड मशीनों के इस्तेमाल को उचित ठहरा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या मशीनों के उपयोग के लिए निर्धारित मानकों और शर्तों का पालन किया गया है।
इस पूरे मामले में जिला खान अधिकारी अंकित चंद्र ने बताया कि चेपड़ों गांव के नीचे चल रहे रिवर ड्रेजिंग कार्य में मशीनों के उपयोग की अनुमति प्रदेश खनन मुख्यालय द्वारा प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि कार्य स्वीकृत नियमों और शर्तों के तहत किया जा रहा है।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ड्रेजिंग कार्य में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि पर्यावरणीय संतुलन और जनसुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर किसी प्रकार की अनदेखी न हो।