*श्री अरविन्द के 154वें जन्मदिवस पर ‘विकसित भारत’ विषयक भव्य कार्यक्रम आयोजित*


बदलता गढ़वाल न्यूज,
गोपेश्वर।

राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गोपेश्वर के अंग्रेजी विभाग (English Council) की ओर से महान दार्शनिक, राष्ट्रवादी चिंतक एवं आध्यात्मिक महापुरुष श्री अरविन्द के 154वें जन्मदिवस के अवसर पर “श्री अरविन्द की विकसित भारत की परिकल्पना : चेतना, संस्कृति, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, नीतियों, समाज और विज्ञान का समन्वय” विषय पर एक भव्य अकादमिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य प्रश्न था – “क्या भारत बौद्धिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, नैतिक और आध्यात्मिक रूप से विकसित हुए बिना वास्तव में विकसित राष्ट्र बन सकता है?”

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट वक्ता श्री अरविन्द के साधक डॉ. चरण सिंह केदारखंडी (सहायक प्राध्यापक, अंग्रेजी विभाग, राजकीय महाविद्यालय, देहरादून शहर) रहे। उन्होंने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि श्री अरविन्द के विचार केवल अध्ययन का विषय नहीं हैं, बल्कि उन्हें जीवन में व्यवहारिक रूप से अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि श्री अरविन्द की आध्यात्मिकता, समग्र जीवन-दृष्टि तथा चेतना के सिद्धांतों को अपनाकर व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकता है और यही व्यक्तिगत विकास राष्ट्रीय विकास का आधार बनता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल आर्थिक उन्नति से नहीं, बल्कि उच्च चेतना, नैतिक मूल्यों, संस्कृति और आध्यात्मिक विकास से संभव है।

कार्यक्रम में विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों ने श्री अरविन्द के विचारों को समकालीन भारत और विकसित भारत-2047 की अवधारणा से जोड़ते हुए अपने विचार प्रस्तुत किए। अंग्रेजी विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार चन्द्रियाल ने “राष्ट्रीय चेतना से समग्र चेतना तक : श्री अरविन्द और विकसित भारत की अवधारणा” विषय पर व्याख्यान देते हुए श्री अरविन्द के राष्ट्रवाद, साहित्य, सावित्री, मानव विकास तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में उनकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
हिंदी विशेषज्ञ डॉ. विनय के. श्रीवास्तव ने “भारतीय भाषाएँ, संस्कृति और विकसित भारत : श्री अरविन्द की दृष्टि में सांस्कृतिक आत्मनिर्भरता” विषय पर भारतीय भाषाओं, संस्कृति, मातृभाषा, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा डिजिटल युग में भारतीय भाषाओं की संभावनाओं पर विचार व्यक्त किए। समाजशास्त्र विशेषज्ञ डॉ. सौरभ कुमार ने मानव एकता, सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता, सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकीकरण तथा सामुदायिक सहभागिता के संदर्भ में श्री अरविन्द के विचार प्रस्तुत किए।

अर्थशास्त्र विशेषज्ञ डॉ. अभय कुमार ने “स्वराज से आत्मनिर्भरता तक : श्री अरविन्द का आर्थिक चिंतन और विकसित भारत का मार्ग” विषय पर स्वदेशी, आत्मनिर्भर भारत, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, युवा उद्यमिता और समावेशी विकास पर विचार रखे। राजनीति विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. मनीष कुमार मिश्रा ने श्री अरविन्द के राजनीतिक चिंतन, स्वराज, उत्तरदायी नागरिकता, सुशासन, लोकतांत्रिक सहभागिता तथा विश्व-एकता के विचारों को रेखांकित किया।

विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. दिनेश सती ने “कृत्रिम बुद्धिमत्ता से समग्र बुद्धिमत्ता तक : श्री अरविन्द, विज्ञान और विकसित भारत का भविष्य” विषय पर विज्ञान, आध्यात्मिकता, मानव चेतना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, जैव-प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष विज्ञान तथा नैतिक तकनीक के महत्व को स्पष्ट किया।

इस अवसर पर आयोजित “श्री अरविन्द की भारत-दृष्टि” विषयक पोस्टर प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता में एम.ए. तृतीय सेमेस्टर की छात्रा अवनि पुरोहित ने प्रथम स्थान, बी.ए. तृतीय सेमेस्टर की छात्रा मुस्कान ने द्वितीय स्थान तथा बी.ए. पंचम सेमेस्टर की छात्रा कनिष्का ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. एम. पी. नगवाल ने अपने संबोधन में कहा कि श्री अरविन्द के विचार आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से श्री अरविन्द के आदर्शों को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अंग्रेजी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. डी. एस. नेगी ने की। उन्होंने कहा कि श्री अरविन्द का साहित्य, दर्शन और राष्ट्रवाद भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का महत्वपूर्ण आधार है तथा विकसित भारत का निर्माण मानवीय मूल्यों और उच्च आदर्शों पर ही संभव है। सभी को श्री अरविन्द अध्ययन केंद्र जोशीमठ की पत्रिका *अनुकम्पा* भी वितरित की गई।

कार्यक्रम में डॉ. जे.एम.एस. नेगी, डॉ. प्रियंका राणा, डॉ. चंदा, श्री मोहित कोठियाल, डॉ. दिनेश गिरी सहित महाविद्यालय के अनेक प्राध्यापक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. राजेश कुमार चन्द्रियाल, विभाग प्रभारी, अंग्रेजी विभाग द्वारा किया गया, जबकि डॉ. दिनेश सिंह ने कार्यक्रम समन्वयक के रूप में सफल संचालन किया।

कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि भारत का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब आर्थिक प्रगति के साथ-साथ बौद्धिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, नैतिक और आध्यात्मिक चेतना का भी समन्वित विकास हो। यही श्री अरविन्द के विकसित भारत का मूल स्वरूप है।

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