मेलखेत हाइड्रो प्रोजेक्ट पर उठे सवाल, पिंडर नदी में खनन का सीमांकन है या नहीं—अधिकारियों को भी नहीं जानकारी
बदलता गढ़वाल न्यूज,
देवाल/गिरीश चंदोला।
देवाल/चमोली जनपद के दूरस्थ विकासखंड देवाल स्थित मेलखेत हाइड्रो प्रोजेक्ट एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि पिंडर नदी में भारी भरकम मशीनों से लगातार खनन किया जा रहा है, लेकिन इसका सीमांकन हुआ है या नहीं, इसकी स्पष्ट जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों के पास भी नहीं है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिंडर नदी का खुलेआम दोहन किया जा रहा है और प्रशासन पूरी तरह बेखबर बना हुआ है। बताया जा रहा है कि नदी के भीतर बड़ी पोकलैंड मशीनों से आईबीएम निकालने का कार्य लगातार जारी है, लेकिन इस पर कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है।
सूत्रों के अनुसार, बड़ी पोकलैंड मशीनों के संचालन के लिए भारी सिक्योरिटी मनी जमा करानी होती है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर वहां काम कर रही 8 से 10 मशीनों की सिक्योरिटी मनी जमा है या नहीं, और इसकी निगरानी कौन कर रहा है।
इससे पहले भी क्षेत्र से लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं कि दूरस्थ इलाका होने के कारण अधिकारी मौके पर निरीक्षण नहीं कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब जिम्मेदार विभाग ही अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रहे हैं, तो हाइड्रो प्रोजेक्ट मनमानी तरीके से कार्य करेगा।
वहीं पर्यावरण को लेकर भी गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं। पतित पावनी गंगा की सहायक पिंडर नदी में हो रहे खनन से जलीय जीवों पर खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि नदी का पानी पूरी तरह दूषित हो रहा है, जिसे लोग पीने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि दिन हो या रात, नदी का सीना छलनी किया जा रहा है और संबंधित विभाग मूकदर्शक बने हुए हैं। ऐसे में अब सवाल शासन-प्रशासन की जवाबदेही पर भी उठने लगे हैं।
प्रदेश सरकार समय-समय पर अवैध खनन और बड़ी मशीनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात करती रही है, लेकिन मेलखेत हाइड्रो प्रोजेक्ट में नियमों का पालन होता नजर नहीं आ रहा। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करता है या फिर पिंडर नदी का दोहन इसी तरह जारी रहेगा।