रिकॉर्ड 3.84 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए श्री हेमकुण्ड साहिब के दर्शन, शीतकाल के लिए बंद हुए कपाट*
*शीतकाल के लिए बंद हुए श्री हेमकुण्ड साहिब और श्री लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट*
*मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सुरक्षित एवं सुगम यात्रा व्यवस्थाओं के बीच श्री हेमकुण्ड साहिब पहुंचे रिकॉर्ड 3.84 लाख से अधिक श्रद्धालु*
बदलता गढ़वाल न्यूज,
जोशीमठ।
सिखों के पवित्र तीर्थस्थल श्री हेमकुण्ड साहिब एवं पौराणिक श्री लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के पावन कपाट शनिवार, 10 अक्टूबर को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। समुद्र तल से लगभग 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित श्री हेमकुण्ड साहिब में कपाट बंद होने के पावन अवसर पर देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं ने मत्था टेककर अंतिम अरदास में सहभागिता की। सेना के बैंड की मधुर धुनों, शबद-कीर्तन और ‘बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के गगनभेदी जयकारों से पूरा धाम भक्तिमय हो उठा। इसके साथ ही वर्ष 2026 की श्री हेमकुण्ड साहिब यात्रा का विधिवत समापन हो गया।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही प्रमुख तीर्थस्थलों की यात्राओं को सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में इस वर्ष श्री हेमकुण्ड साहिब यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षित आवागमन और व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया। दुर्गम पर्वतीय मार्गों, अत्यधिक ऊंचाई और मौसम की चुनौतियों के बावजूद इस वर्ष रिकॉर्ड 3,84,500 से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र धाम पहुंचकर गुरु महाराज के समक्ष शीश नवाया। कपाट बंद होने के अंतिम दिन भी लगभग पांच हजार श्रद्धालुओं ने धाम पहुंचकर दर्शन किए और अरदास में भाग लिया।
23 मई से प्रारंभ हुई यात्रा के अंतिम दिन गोविंद धाम (घांघरिया) से रागी जत्थे के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्री हेमकुण्ड साहिब पहुंचे। इस वर्ष कपाट बंद होने के समारोह में पाकिस्तान से आए सिख श्रद्धालुओं का जत्था भी विशेष आकर्षण रहा। इसके अतिरिक्त संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, यूरोप, मलेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर और दुबई सहित विभिन्न देशों से आए श्रद्धालुओं ने भी पवित्र गुरुद्वारे में मत्था टेका।
कपाट बंद होने की धार्मिक प्रक्रिया प्रातः सुखमनी साहिब के पाठ के साथ प्रारंभ हुई। इसके बाद श्री दरबार साहिब, अमृतसर के हजूरी रागी सिंह गुरदियाल सिंह एवं उनके जत्थे ने शबद-कीर्तन प्रस्तुत कर संगत को भाव-विभोर किया। धार्मिक समारोह के दौरान श्रद्धालुओं ने गुरु महाराज के समक्ष शीश नवाकर देश-विदेश की सुख-समृद्धि, शांति और मानवता के कल्याण की कामना की। दोपहर में यात्रा की अंतिम अरदास संपन्न हुई। इसके उपरांत हुक्मनामा लिया गया और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को पंज प्यारों की अगुवाई में पूरे सत्कार के साथ दीवान हॉल से सचखंड साहिब स्थित उनके शीतकालीन निवास तक ले जाया गया। इस पावन शोभायात्रा का नेतृत्व गढ़वाल स्काउट्स बैंड तथा 418 इंडिपेंडेंट इंजीनियर कोर के जवानों ने किया।
इस अवसर पर गुरुद्वारा श्री हेमकुण्ट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन सरदार नरिंदरजीत सिंह बिंद्रा ने यात्रा को सफल बनाने में योगदान देने वाले समस्त श्रद्धालुओं, राज्य सरकार, जिला प्रशासन और भारतीय सेना के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विभिन्न गुरुद्वारों में सेवारत कर्मचारियों एवं सेवादारों का भी धन्यवाद किया और कहा कि उनके समर्पण, सेवा भावना तथा अथक परिश्रम से इतनी बड़ी धार्मिक यात्रा का सफल संचालन संभव हो सका। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अब रतूड़ा गुरुद्वारा भी संगत के लिए खुल गया है।
ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सरदार सेवा सिंह ने भी यात्रा के दौरान संगत से मिले सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के अनुशासन, सहयोग और सेवा भावना ने यात्रा की व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सभी धार्मिक परंपराओं एवं अनुष्ठानों के विधिवत निर्वहन के बाद श्री हेमकुण्ड साहिब और श्री लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता, प्रतिकूल मौसम के बावजूद अटूट आस्था और गरिमापूर्ण धार्मिक समारोह के साथ इस वर्ष की यात्रा का समापन हुआ।
अब शीतकाल के दौरान धार्मिक परंपराओं के अनुरूप व्यवस्थाएं संचालित रहेंगी। ग्रीष्मकाल 2027 में कपाट पुनः खुलने के साथ श्रद्धालु एक बार फिर इस पवित्र तीर्थ के दर्शन कर सकेंगे।